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“सच्ची भक्ति वही है, जिसमें अहंकार नहीं होता; और सच्चा दान वही है, जिसमें दिखावा नहीं होता।
”ईश्वर उन हृदयों में बसते हैं, जो निर्मल, विनम्र और सेवा भाव से परिपूर्ण होते हैं।
भक्ति, दया और सेवा — यही जीवन का सच्चा महायज्ञ है।
जो दूसरों के लिए दीपक जलाता है, उसका मार्ग स्वयं प्रकाशित हो जाता है।”
सेवा और दान – यही मानवता का सार है।

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